Introduction

The Architects of (Amendment) Bill, 19801

THE MINISTER OF EDUCATION AND SOCAL WELFARE (SHRI S. B. CHAVAN): Sir, I beg to move for leave to introduce a Bill to amend the Architects Act, 1972.

The question is proposed.

श्री शिव चन्द्र झा (बिहार): उप-सभापति महोदय, यह जो वास्तुविद (संशोधन) विधेयक है, इस पर मैं यह आपत्ति करने जा रहा हूँ कि सबार्डिनेट लेजिस्लेशन कमेटी जो हमारी है उसने जो सिफारिश की है कि जो रूल्स एण्ड रेगुलेशंस बनाए जाएँ काउंसिल के और आर्किटेक्ट्स के, वह सदन में रखे जाएं। बात छोटी-सी है परन्तु उसके मुतावि रूल्स एण्ड रेगुलेशंस सदन-पटल पर रखने की परिपाटी पहले नही थी । मैं जानना चाहता हूँ, कितने ऐसे सरकारी विधेयक हैं जिन सबको मिला कर एक कांप्रिहैंसिव रूप में ला कर सदन के पटल पर रख दिया है, अर्थात् बहुत से ऐसे विधेयक होंगें जिनके मातहत रूल्स एण्ड रेगुलेशंस सदन-पटल पर रखे जाने चाहिये थे लेकिन यह तो कुम्भकर्ण की नींद में सरकार है और श्रीमन्, कभी-कभी इसकी नींद टूट पड़ती है और इस विधेयक में भी उसकी नींद से आँखें खुली । तो मैं जानना चाहूँगा कि इसके साथ-साथ और विधेयक जो भी हैं क्या उनके संबंध में भी रूल्स एण्ड रेगुलेशंस सदन-पटल पर सरकार रखेगी ? इन्ही शब्दों के साथ मैं स्थान ग्रहण करता हूँ ।

MR. DEPUTY CHAIRMAN: The question is:

"That leave be granted to introduce a Bill further to amend the Architects Act, 1972."

The motion was adopted.

SHRI S. B. CHAVAN: Sir, I introduce the Bill.

Consideration and Passing

289 Architects [3 DEC. 1980 ] (Amdt.) Bill. 1980 2902

THE ARCHITECTS (AMENDMENT) BILL, 1980

THE MINISTER OF EDUCATION AND SOCIAL WELFARE (SHRI S. B. CHAVAN):Sir, I beg to move:

"That the Bill to amend the Architects Act, 1972, be taken into consideration."

Sir, this is a very formal type of Bill wherein the recommendations of the Subordinate Legislation Committee to put in the substantive Act the powers delegated are given effect to. And under this, section 45 is proposed to be amended to incorporate the recommendations of the Subordinate Legislation Committee. I don't think that there is much scope in this, and merely the recommendations of the Subordinate Legislation Committee are being incorporated in this Bill. So, I do not propose to add anything more. The Statement of Objects and Reasons is absolutely clear on this issue. I request the hon. House to take this Bill into consideration.

The question was proposed.

SHRI S. W. DHABE (Maharashtra): Mr. Vice-Chairman, Sir, this is a formal Bill for implementing the recommendations of the Subordinate Legislation Committee.

Sir, I fail to understand why so much time of the House has been taken for this sort of legislation. This is the third Bill that we are considering for only this clause. The first was the Mica Mines Labour Welfare Fund Bill. Yesterday we were considering the Territorial Army (Amendment) Bill. And today, we are considering this Architects (Amendment) Bill, Sir, all these could have been done in one consolidated form, giving only the list of Acts where this clause is to be added. The clause is identical; there is - no difference except the words, 'rules and regulations'. All this should have been instead of people discussing them everyday. But, Sir, one advantage now is that we can discuss some of the points relating to the Act which we are considering.

Sir, I will take this opportunity to make a few suggestions on this Act or 1972. Architects only prepare plans and designs and they not carry out the actual building construction work. That is the job of engineers, but this Act covers only the architects and actual engineering and other things are not the subject matter of this Act. In fact, civil engineers are responsible for construction work. Even for that purpose the architects are required and that has been an important matter nowadays. When we discussed the Asian Games, event the design of the stadium was itself a matter of controversy. I' will bring to the notice of the hon. Minister one or two provisions of this Act which require reconsideration, such as clause 25. Clause 25 (b) provides that even if a person does not hold a recognised qualification but, being a citizen of India, has been engaged in practice as an architect for a period of not less than five years, he shall have his name entered into the register along with those who have got recognised qualifications. But suppose any such person is found to be incompetent who cannot do the job, because he is only enrolled and he does not hold any qualifications but has worked for five years without qualifications, how to deal with him? Section 30 of the Act provides that when on receipt of a complaint made to it, the Council is of the opinion that any architect has been guilty of professional misconduct which, if proved, will render him unfit to practice as an architect, the Council may hold an inquiry in such manner as may be prescribed. It does not provide that if the man is found incompetent or cannot do the job, he can be removed from the Register of Architects. Therefore, clauses 25 and be seriously considered whether incompetent and inefficient people can be kept on the Register. Section 22 defines professional conduct in clause (2) thus: Regulations made by the Council under sub-section (1) may ify (SIC) which violations thereof shall constitute in famous conduct in any professional respect, that is to say, professional misconduct, and such provision shall have effect notwithstanding anything contained in any law for the time being in force.

One more thing that I want to say at this stage is that it is an urban oriented Act. With the re-introduction of 20-point programme and having a large number of housing schemes in the rural areas, proper designs are not made the houses will become slums , it is very essential that the houses in rural areas are designed from the architectural point of view. Today's architects are so costly that it is not possible for a poor man or a rural man or a villager to engage their services. Therefore, I would suggest that some machinery should be found out either by having a panel of architects or some such thing, whose services can be utilised on ; of (SIC) small fees, which will be useful for the middle-class and poor people. With these suggestions, Sir, I support the Bill.

श्री शिव चन्द्र झा (बिहार) : उपसभाधयक्ष जी, इस विधेयक में मोटे तौर पर कुछ नहीं है । रूल्स एण्ड रेगुलेशंस पार्लियामेंट के सामने रखे जायेंगे जो पहले व्यवस्था नहीं थी इसमें केवल इतना ही है, इस लिये इसका समर्थन करने में मुझे कोई एतराज नहीं है । मैं इसका समर्थन करता हूँ । लेकिन इस विधेयक को लेकर कुछ बातें आ जाती हैं जो मैं माननीय मंत्री जी के सामने रखना चाहता हूँ । आज के जमाने में माडर्न आर्किटेक्ट में स्काई स्क्रेपर्स और रेक्टेंगलर हैं । यह सिलसिला चल रहा है कि आप यहाँ भी बड़े-बड़े मकान रेक्टेंगलर हों, स्काई स्क्रेपर्स हों न्यूयार्क के पैटर्न पर बनाने जा रहे हैं । इसमें क्या होता है कि इनडिजनस आर्किटेक्चर का जो सिलसिला हमारे यहाँ था उसका खात्मा हो । प्रिजर्व करने का कोई तरीका आपके पास है ? आज की हवा में, आज के वातावरण में जो हमारा पुराना मकान बनाने का आर्किटेक्चर माडल जो था वह आउट आफ डेट होता जा रहा है । मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ कि हमारे पुराने आर्किटेक्चर में कोणार्क सन टेम्पल है । वह बरबाद हो रहा है । सरकार के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह पुराने को प्रिजर्व कर सके । कोणार्क सन टेम्पल के बारे में बार-बार यहाँ बात आ चुकी है । वह बहुत सुन्दर ढंग से बना हुआ है लेकिन समुद्र की हवा और नमक की लहरों से वह खराब होता जा रहा है और आप उनको ठीक करने के लिए बाहर से विशेषज्ञ बुलाते हैं जो उनका इन्सपेक्शन करते हैं, जाँच करते हैं । मैं चाहता हूं कि आप अपने अन्दर इस प्रकार की क्षमता पैदा कीजिये कि हमारी जो पुरानी धरोहर है, जो हमारी पुरानी कला है, उसको प्रिजर्व करने की तरफ ध्यान दीजिय और उस कला को आज के जमाने में आगे बढ़ाने के लिए कोई रास्ता निकालिये । अभी तो हमें ऐसा दिखाई देता है कि उस कला को और पुरानी धरोहर को प्रिजर्व करने के लिए कोई रास्ता नहीं निकाला जा रहा है ।

अब मुझे यह कहना है कि शहरों में तो आप बड़ी बड़ी बिल्डिंग्ज बनाते जा रहे हैं और उन्को रेक्टेंगुलर आप बढ़ाते हैं । शहरों में मकान बनाने की आपने नई नई योजनाएँ बनाई हैं और उनके लिए नये नये तरीके निकालते जाते हैं । यही कारण है कि आज शहरों में बड़ी बड़ी अट्टालिकाएँ तैयार होती जा रही हैं । ये बड़े बड़े मकान छ: महीने में, पाँच महीने में तैयार हो जाते हैं । लेकिन रूरल एरियाज में किस प्रकार के माडल बनाये जायें, इस बारे में कुछ नहीं सोचा गया है । आइडियल विलेज का माडल सरकार के सामने है । गाँवों को बसाने का आइडियल विलेज का माडल, एक आदर्श आपके सामने है । लेकिन अभी तक गाँवों में कोई आदर्श मकान बनाने का पैटर्न नहीं बन सका है । इस बात की जरूरत इसलिए और भी ज्यादा के पास मकान नहीं होते हैं, घर नहीं होते हैं । आप गांवों में गाँव वालों को मकान बनाने में किस तरह से दे सकते हैं, इस पर आपको विचार करना चाहिये और गाँवों के लिए भी कोई पैटर्न बनाना चाहिए । जैसे आपने टाउन्स के लिए पैटर्न बना दिया है और मकान रेक्टेंगुलर रूप से बढ़ते जा रहे हैं । इसी तरह से एक रूरल पैटर्न भी होना चाहिए ।

एक बात यह भी कही गई है कि हमारे देश में आर्किटेक्चर के क्षेत्र में भी काफी अनएंप्लॉयमेंट है कि जो लोग बाहर से पढ़ कर आते हैं उनको भी काम नहीं मिल पाता है । इसीलिए कुछ लोग पोलीटिक्स में आ गये हैं । श्री पीलू मोदी ऐसे ही आदमी हैं जो कि राजनीति में आए हैं । हमारे देश में बहुत से आर्किटेक्चर पढ़े हुए नवजवान हैं जो कि अनएंप्लॉयड हैं । मैं चाहता हूं कि इन लोगों की तरफ सरकार ध्यान दे, इनको काम दिलाने की कोशिश करे । इन लोगों की संख्या भी ज्यादा नहीं है । ये थोड़े से ही लोग हैं । अगर आप इनको इम्प्लायमेन्ट देंगें तो वे आपके विकास कार्यों में अपना योगदान दे सकेगें । मैंने ये सारी बातें सरकार के सामने रखी हैं । मुझे उम्मीद है कि सरकार इन बातों पर ध्यान देगी । इन शब्दों के साथ मैं इस बिल का समर्थन करता हूँ ।

श्री बी. सत्यनारायण रेड्डी (आंध्र प्रदेश) : उपसभाध्यक्ष जी, इस एमेन्डमेन्ट बिल का मकसद आर्किटेक्ट्स एक्ट में जो सेक्शन 45 है उसमें जो कौंसिल आफ आर्किटेक्ट्स है उसको रेगुलेट करना है । पहले उसके लिए कोई प्राविजन नहीं था । इसको पहले पार्लियामेंट के सामने लाया नहीं गया था । लेकिन अब एमेन्डमेन्ट बिल के जरिए जो रूल्स बनते हैं उनको पार्लियामेन्ट के सामने लाया जाना है । मैं इस बिल का अनुमोदन करता हूँ सपोर्ट करता हूं । इसके साथ-साथ मैं बिल के बारे में दो चीजें कहना चाहता हूँ। यह जो आर्किटेक्ट्स एक्ट बनाया गया है यह हिन्दुस्थान के कुछ हिस्सों में ही इस्तेमाल उपयोग सीमित रूप से होगा, क्योंकि हमारे मुल्क में कितने लोग आर्किटेक्ट्स के पास जाते हैं ? मैं समझता हूं कि आर्किटेक्ट के पास वे ही लोग जाते हैं जिनके पास काफी दौलत हो । गरीब आदमी इनके पास नहीं जा सकता । जो आदमी गाँवों में बसे हुए हैं, जो खेती पर लगे हुए हैं, जो कारखानों में काम करते हैं, जो हमारे देश में मजदूर हैं और जिनकी तन्खवाह सिर्फ दो सौ या तीन सौ या हजार रुपयों तक भी होती है तो वे लोग भी आर्किटेक्ट के पास नहीं जा पाते हैं । आर्किटेक्ट के पास वही लोग जाएगें जो या तो मिल औनर्स होंगे या ब्लैकमारकिटियर्स होंगे या जिन्होने इल्लीगल तरीके से समाज को लूट कर पैसा कमाया हो । इनके अलावा सरकार जो स्कीमें बनाती है, मकान बनाती है, उनके लिए आर्किटेक्ट से मदद लेती है । मुझे इस संबंध में सिर्फ इतना ही कहना है कि आप इस एक्ट को इस तरीके से बनाइये कि जिससे इसका स्कोप बढ़े । आज हमारे मुल्क में लाखों की तादाद में लोग बेकार हैं । मैं जानना चाहता हूँ कि उसके लिए सरकार के पास इन लोगों का इस्तेमाल करने के लिए क्या कोई योजना है या नहीं ? हमारे देश के आर्किटेक्ट्स भी देहातो में जायें और उनको काम मिल सके, इसके लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए ।जैसा अभी कहा गया है कि ये जो ट्रेन्ड लोग हैं, इनमें काफी बेकार हैं । मैं चाहता हूँ कि इन लोगों को योजनाएं बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि हमारा देश खुश-हाल बन सके । आपको इन लोगों की बेकारी दूर करने के लिए कोई स्कीम बनानी चाहिए । उनकी सर्विसेज को यूटिलाइज करने के लिए इस सिलसिले में सरकार क्या कोई योजना बनायेगी ? अगर इस तरह की कोई योजना बनाये तो ठीक होगा । मैं मंत्री महोदय से यह ख्वाहिश करूँगा इस सुझाव के बारे में विचार करें कि किस तरह से, किस ढ़ंग से वे इन आर्किटेक्ट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं ।

दूसरी बात यह है कि यह ऐक्ट जो है वह सिर्फ आर्किटेक्ट्स को प्रोटेक्शन देने के सिलसिले में है, ऐसा कहा गया है । यह प्रोटेक्शन किस तरीके से होगा ? दूसरा आदमी अपने आपको आर्किटेक्ट नही कह सकता । आज हजारों की संख्या में जो इंजीनियर है वे भी इस तरह का काम करते हैं और उसमें अपनी काबलियत का इस्तेमाल करते हैं । लाखों की संख्या में मकान उनकी मेहनत से बन रहे हैं परन्तु वे अपने आपको आर्किटेक्ट नहीं कह सकते हैं । वे इस तरह का काम कर सकते हैं, वे अपने इस काम को अंजाम दे सकते हैं परन्तु उनको आर्किटेक्ट की संज्ञा न दें यह सुपरफ्लुअस मालूम होता है । हम चाहते हैं कि जो इस आर्ट में इस काम में माहिर है, वह अपने को आर्किटेक्ट कहे या इंजीनियर कहे, कुछ भी कहे, हमारे सामने इन लोगों की सर्विसेज को यूटिलाइज करने का सवाल है । इम्पाइमेन्ट होने का सवाल है । जो आर्किटेक्ट है, जो इंजीनियर है, जो इस काम में माहिर है, उनको किस तरह से इम्पलाइमेन्ट दिया जा सकता है, इस सिलसिले में अगर आप सोचें तो बहुत अच्छा होगा । इसी के साथ सरकार हिन्दुस्तान को बनाने के लिए समाज की जो पीड़ित जनता है उनको सही मायनों में अपना सर छुपाने के लिए एक मकान हो, उसके लिए इनकी सर्विस का आप इस्तेमाल करें तो नये हिन्दुस्तान को बनाने में यह बहुत अच्छा होगा । मेरा निवेदन है कि मंत्री जी इस पर सोचें । धन्यवाद !

SHRI S. B. CHAVAN: Sir, I am thankful to the Hon. Members so good suggestions on the 1 which is the consideration of the House. But I would like to keep myself limited to the purpose of the Bill which has been placed before this House for consideration. This is a very simple Bill. My hon. friend, Mr. Dhabe, enquired from me as to why is it that a consolidated Bill is not being brought forward before this House. He was asking, instead of our discussing one Bill every day on the same subject having similar kinds of provisions, why should we not go in for a consolidated Bill, wherein, all the Acts in which similar kinds of amendments are proposed, could be brought together. If that be the position, I do not think there would have been this amount of scope for discussion which we find today on this Bill. In regard to this Bill, the purpose was very limited, but hon. Members had occasion to say so many things due to which, the Government was enlightened on some points and certainly, those points have been noted down. Certainly, this is a matter also to be considered and whether any legal difficulties are being presented or not, it will be too early for me to say. At this stage, I do not propose to say anything more because, three hon. Members who spoke on this Bill, all the three of them, have supported the provisions of this Bill. Besides, they had some problems to mention. These have been clearly stated and they have been noted down by me. It will definitely receive due consideration at the hands of the Government. With this, I commend this Bill for the consideration of the House.

THE VICE-CHAIRMAN (SHRI BISHAMBHAR NATH PANDE): The question is:

"That the Bill to amend the Architects Act, 1972, be taken into consideration."

The motion was adopted.

THE VICE-CHAIRMAN (SHRI BISHAMBHAR NATH PANDE) : Now, we shall take up clause-by-clause consideration of the Bill.

Clause 2 was added to the Bill. ..

Clause 1, the Enacting Formula and the Title were added to the Bill.

SHRI S. B. CHAVAN: Sir, I move:

"That the Bill be passed."

The question was put and the motion was adopted,

THE VICE-CHAIRMAN (SHRI BISHAMBHAR NATH PANDE): The House stands adjourned till 11 A. M. tomorrow. •

The House adjourned at six minutes past five of the clock, till eleven of the clock on Thursday, the 4th December, 1980.

GMGIPND—Lino—1383 RS—11-3-81

  • 1. Motion Number: 116
    Date of debate: 20-Nov-1980
    Debate type: Part 2 (Other than Question and Answer)
    Debate title subject: GOVERNMENT BILLS- INTRODUCTION
    Title: The Architects of (Amendment) Bill 1980
    Members Participated: SHIVA CHANDRA JHA
    DEPUTY CHAIRMAN
    Page number from to: 235-236
    Ministry : EDUCATION AND SOCIAL WELFARE
    Minister's name: S.B. CHAVAN
    Date of Publishing: 7-Jul-2011
    URI: http://rsdebate.nic.in/handle/123456789/399337
    Appears in Collections: Part 2 (Other Than Question And Answer)
  • 2. Session Number: 116
    Date of debate: 3-Dec-1980
    Debate type: Part 2 (Other than Question and Answer)
    Debate title subject: GOVERNMENT BILL -CONSIDERATION & PASSING/RETURN/WITHDRAWAL
    GOVERNMENT BILLS- INTRODUCTION
    Title: THE ARCHITECTS (AMENDMENT) BILL, 1980
    Members Participated:

    BISHAMBHAR NATH PANDE
    SHIVA CHANDRA JHA
    B. SATYANARAYAN REDDY
    S.W. DHABE
    Page number from to: 290-298
    Ministry : EDUCATION AND SOCIAL WELFARE
    Minister's name: S.B. CHAVAN
    Date of Publishing: 7-Jul-2011
    URI: http://rsdebate.nic.in/handle/123456789/399089
    Appears in Collections: Part 2 (Other Than Question And Answer)