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Subject: ई-प्रशासन से भ्रष्टाचार पर लगाम

ई-प्रशासन से भ्रष्टाचार पर लगाम
राकेश शर्मा निशीथ*
भ्रष्टाचार का मुख्य कारण आम लोगों के पास सूचनाओं का अभाव है । ऐसे में ई-प्रशासन
(ई-गवर्नमेंट) से कार्यालयी भ्रष्टाचार और टेबल-दर-टेबल व्याप्त अनियमितता काफी कम हो
जाएगी और काम भी त्वरित गति से हो पाएगा । जब सूचनाएं ऑन लाइन होने लगेंगी तो कोई
भी व्यक्ति जनता से सूचना, सूचनाएं छिपा नहीं सकेगा । इसमें ई-प्रशासन महत्वपूर्ण भूमिका
निभा सकता है ।
नागरिक सेवा मुहैया कराने में राज्य की सफलता इस पैमाने पर आंकी जाती है कि सरकारी
सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच कितनी आसान है । लेकिन सरकारों के लिए यह मुमकिन नहीं है
कि उसके अधिकारी देश के हर नागरिक तक पहुंच कर उसकी समस्याएं जाने और उनका निवारण
करें । इसलिए अपनी सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए दुनिया भर की सरकारें सूचना
प्रौद्योगिकी के आधुनिक साधनों का इस्तेमाल कर रही हैं ।
यह नई प्रशासनिक व्यवस्था ई-प्रशासन (इलेक्ट्रॉनिक-प्रशासन) व्यवस्था कहलाती है ।
ई-प्रशासन व्यवस्था भ्रष्टाचार के रोग का कारगर इलाज हो सकती है क्योंकि यह भ्रष्टाचार
के कारणों पर सीधा और अचूक असर करेगी । विश्व में कोरिया, चीन, अमेरिका, यूरोप के कई
देशों में ई-प्रशासन व्यवस्था कायम की गई है । भारत में ई-प्रशासन का इतिहास ज्यादा
पुराना नहीं है । नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) की स्थापना और रेल टिकटों की
ऑनलाइन बुकिंग से यहां इसकी शुरूआत हुई । केन्द्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ब्लॉक
स्तर पर संचार नेटवर्क बनाने के लिए 3300 करोड़ रुपये व्यय करके स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क
(स्वान) का निर्माण किया है । आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, दिल्ली, चंडीगढ, ग़ोवा, असम,
पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने एनआईसी के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में ई-प्रशासन का
सफल प्रयोग किया है ।
ई-सरकार (ई-गवर्नमेंट) एक प्रकार की सुविधा है । इसके माध्यम से व्यक्ति घर बैठे कंप्यूटर के
माध्यम से संबंधित अधिकारी से अपने कार्य के बारे में सूचना हासिल कर सकेंगे । सवाल पूछ
सकेगा। ऐसे में जब कोई अधिकारी लोगों के प्रत्यक्ष संपर्क में नहीं रहेगा तो घूस मांगने की
संभावना भी नहीं रहेगी। कार्य भी उसका अधिक दिनों तक टाला नहीं जा सकेगा क्योंकि सब
कुछ रिकार्ड में रहेगा । अभी तक भ्रष्टाचार का एक बड़ा कारण यह है कि अधिकारी अक्सर
लोगों के कार्यों को लटकाकर धन की उगाही कर लेते हैं । इसके माध्यम से शासकीय कार्य
व्यवहार, सूचना, सेवा, सुविधा, व्यवसाय तक आम जनता की पहुंच सुलभ होती है ।
इस प्रणाली में सूचना संचार प्रौद्योगिकी के इंटरनेट, मोबाइल फोन जैसे सभी साधनों का
समावेश होता है। ई-प्रशासन एक व्यापक अवधारणा है । यह सूचना एवं संचार तकनीक का
इस्तेमाल करके सरकार तथा उसके संगठनों, संस्थानों और समाज के बीच भागीदारी बढाने का
काम करता है । इसके माध्यम से सरकार तथा दूसरी राजनैतिक पार्टियां अपने सिध्दांत,
कार्य, कार्यक्रम तथा मंत्रालयों से संबंधित जनोपयोगी समाचार और सूचनाएं मुहैया कराती हैं
। यह सरकार का इलेक्ट्रॉनिक प्रचार माध्यम है । उपयोगिता
यह व्यवस्था शासकीय अथवा प्रशासनिक कार्यों को ऑन लाइन प्रणाली के माध्यम से सबसे पहले
बिचौलियों और दलालों को खत्म करेगी । कार्य के प्रत्येक चरण की प्रक्रिया कंप्यूटर में दर्ज
रहती है । इस कारण किसी भी स्तर पर की गई हेराफेरी का आसानी से पता चल जाता है ।
इस पारदर्शिता के कारण जागरूकता और भागीदारी बढती है । मानवीय हस्तक्षेप और कागजी
कार्रवाई न के बराबर होती है । जमीन की मिल्कियत संबंधी कागजातों के कंप्यूटरीकरण और
भू-राजस्व उगाही की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कर्नाटक सरकार ने भूमि नामक ऑन
लाइन व्यवस्था तैयार की है ।
इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य भर की जमीन के कागजों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा गया है ।
कर्नाटक में नौ हजार गांवों के लगभग सात लाख किसानों की जमीन के 20 लाख अभिलेख भूमि
प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजस्व विभाग ने ऑन लाइन करवा दिए हैं । अब उन्हें खसरा, खतौनी के
लिए पटवारी तथा लेखपाल का चक्कर लगाने, तहसील-तालुका तक दौड़ने, महीनों इंतजार की
आवश्यता नहीं रहती । अब उन्हें अपनी जमीन का नक्शा, मालिकाना हक या अन्य कोई
प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध हो जाता है । हर व्यक्ति को इस भूमि व्यवस्था तक पहुंच हो
इसके लिए राज्य भर में सूचना केन्द्र बनाए गए हैं । इससे राजस्व विभाग में किसानों की
रोज-रोज की दौड़ खत्म हुई है । इसी तरह गोवा का कोई निवासी कई तरह के लाइसेंस और
परमिट के लिए बिना किसी सरकारी दफ्तर का चक्कर काटे आवेदन कर सकता है । दिल्ली के
लोग अधिक जागरूक हैं । दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी
विभागों की वेबसाइटों का मास्टर पोर्टल delhigovt.nic.in एक ऐसी खिड़की है जिससे
लगभग पूरी दिल्ली देखी जा सकती है । यह पोर्टल न सिर्फ सूचनाएं मुहैया कराता है बल्कि
विभिन्न विभागों तक लोगों की पहुंच भी सुनिश्चित करता है । जन्म, मृत्यु, विवाह, आय और
जाति प्रमाणपत्रों के लिए ऑन लाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। प्रशासनिक तंत्र में
सुधार के लिए पंजाब सरकार ने सिंगल यूजर विंडो डिस्पोजल हेल्पलाइन फॉर एप्लीकेंट्स
(सुविधा) परियोजना शुरू की है । इसके अंतर्गत विभिन्न तरह के लाइसेंस, पासपोर्ट, राशन
कार्ड और पेंशन जैसी 24 सरकारी सेवाओं से संबंधित शिकायतों का निपटारा एक ही छत के नीचे
किया जाता है । राज्य के सभी 18 जिलों में सुविधा केन्द्र खोले गए हैं, जो पूरी तरह ऑन
लाइन हैं। कंप्यूटीकरण से कितनी मदद मिल सकती है इसका उदाहरण न्यायालयों का
कंप्यूटरीकरण है । सर्वोच्च न्यायालय के पूर्णतः कंप्यूटरीकरण से लंबित मामलों की संख्या में
काफी गिरावट आई है । 1996 में कंप्यूटरीकरण से पहले सर्वोच्च न्यायालय में जहां 1,52,000
मुकदमे लंबित थे, वहीं अब लंबित मामलों की संख्या घटकर 29,000 के करीब रह गई है । सुझाव
ई-गवर्नमेंट प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाए, इसके लिए इसे व्यापक स्तर
पर लागू करना होगा । प्रचार और जन जागरूकता के अभाव में 80 प्रतिशत इंटरनेट
प्रयोगकर्ताओं में से मात्र 8 प्रतिशत ही इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं । ई-प्रशासन
व्यवस्था की सेवाओं का उपयोग करने के लिए नागरिकों को भी इसके योग्य बनाना होगा ।
इसके लिए शिक्षा देने के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ शिक्षा की डिजिटल तकनीकों का भी
इस्तेमाल करके नागरिकों को ई-प्रशासन के लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना होगा । सूचना
का अधिकार लोगों को सूचना की मांग करने का अधिकार देता है तो ई-प्रशासन सरकार को
सूचना की आपूर्ति करने का साधन उपलब्ध कराता है । (पसूका)